Saturday, 12 November 2016

पानी की एक बूँद


सागर में मिली तो वजूद खो दिया
आँखों से आंसू बनकर टपकी तो दिल रो दिया |
एक दिन हरे पत्ते पर बैठकर इठला रही थी
तभी सूरज ने आकर कैद कर दिया किसी बादल में |
बादल से गिर सड़क पर एक धब्बा सा,
और फिर से गुम हो गई जब बच्चे ने मारा छपक्का सा |
खाने की मेज़ पर राखी प्लेट पर सुस्ता रही थी,
और तभी बहु रानी ने आकर साफ़ कर दिया |
मानो किसी ने बिना माफ़ी के बहार कर दिया |
शायद मैं वही पानी की एक बूँद हूँ |


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